राम कथा हमें आशावाद सिखाती है

राम कथा

Ram Katha

श्रीराम कथा हमें जीवन जीने की कला सिखाती हैः

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान की भावना हमारी विरासत है और सनातन धर्म का अनिवार्य हिस्सा है जो हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। सनातन धर्म हिंदुओं द्वारा हिंदू धर्म को संदर्भित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक उपनाम है: यह हिंदू धर्म के “शाश्वत” सत्य और शिक्षाओं को संदर्भित करता है।

महंत दिग्विजयनाथ की 53वीं और महंत अवैद्यनाथ की आठवीं पुण्य तिथि पर श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।

मंत्री ने कहा, ”राम कथा हमें आशावाद सिखाती है.”

“भगवान राम हमें सकारात्मक रहने, सत्य की खोज करने और सबसे कठिन परिस्थितियों से लड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। हम सभी को राम कथा से आशावाद की सीख लेनी चाहिए ।”शनिवार को कलश यात्रा के साथ ही करीबी ग्राम नीमसराय में 9 दिवसीय रामकथा आरंभ हो गई। रामकथा का शुभारंभ करते हुए व्यास पीठ पर विराजमान रामकथा के मर्मज्ञ कांटाफोड़ के पंडित नारायण शास्त्री ने कहा कि भगवान राम जैसा चरित्र इस संसार में पैदा नहीं हुआ। वह परम उदार, दयालु और मार्ग दर्शक हैं। भगवान राम का नाम उनसे बड़ा है। उनके नाम में इतनी शक्ति है कि अगर सच्ची भक्ति और निष्ठा से पत्थर पर लिखने से पानी तैरने लगता है। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहे जाते हैं।

सदियों से अभिभावक उनके जैसा बेटा चाहता है। उन्होंने श्रीराम कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि श्रीराम कथा हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। कथा सुनने मात्र से ही प्रभु की कृपा मिलती है। नारायण शास्त्री ने कहा कि जहां भगवान श्रीराम की कृपा होती है, उसी जगह रामकथा संभव हो पाती है। राम की कृपा वहीं होती है, जहां उनके भक्त रहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु ने ही मानव शरीर बनाया है। लेकिन पुरुषार्थ मानव का धर्म है। बिना परिश्रम के कुछ भी मिलना असंभव है। रामकथा से हर जीव की व्यथा दूर हो जाती है। संसार के सभी जीवों का मंगल रामकथा के श्रवणपान से ही हो जाएगा।

कथा सुनने के लिए पंडाल में पुरुषों के साथ ही सैकड़ों महिला भक्त भी मौजूद रहीं।कथा के पूर्व आयोजन समिति के विजय सोमानी ने कहा कि राम कथा से पूरा वातावरण शुद्ध होता है। रामकथा को केवल सुनना नहीं बल्कि उससे मिलने वाली सीख को स्वीकार भी करना चाहिए। इससे पहले समूचे गांव में भव्य कलश यात्रा निकली, जो गांव की विभिन्ना गलियों से होते हुए कथा स्थल पहुंची। कलशयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं और बालिकाओं ने अपने सिर पर कलश धारण किया हुआ था। कलश यात्रा में कृषि मंत्री कमल पटेल विशेष तौर पर शामिल हुए। उन्होंने कन्यापूजन कर कन्याओं को भेंट दी।

कथावाचक पंडित नारायण शास्त्री का पुष्पहार से स्वागत कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

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