Shri Bhairav Aarti: श्री भैरव जी की आरती व चालीसा पाठ

श्री भैरव जी की आरती

श्री भैरव देव की आरती हिंदी व अंग्रेजी में तथा श्री भैरव जी की चालीसा पाठ। आइए दोस्तों काल को भय देने वाले श्री भैरव देव जी की आरती व चालीसा पाठ जानते हैं।

1. श्री भैरव जी की आरती – हिंदी में

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा

जय काली और गौर देवी कृत सेवा ।।

जय भैरव

तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक

भक्तो के सुख कारक भीषण वपु धारक

जय भैरव

वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी

महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ।।

जय भैरव

तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे

चौमुख दीपक दर्शन दुःख खोवे ।।

जय भैरव

तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी

कृपा कीजिये भैरव, करिए नहीं देरी ।।

जय भैरव

पाँव घुँघरू बाजत अरु डमरू दम्कावत

बटुकनाथ बन बालक जल मन हरषावत ।

जय भैरव

बत्कुनाथ जी की आरती जो कोई नर गावे

कहे धरनी धर नर मनवांछित फल पावे ।।

जय भैरव

*जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा

जय काली और गौरा करत तेरी सेवा

जयभैरव देवा …..

तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक ।

भक्तो के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥

जय भैरव देवा…

वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी ।

महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ॥

जय भैरव देवा…

तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे ।

चौमुख दीपक दर्शन दुःख खोवे ॥

जय भैरव देवा…

तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी ।

कृपा कीजिये भैरव, करिए नहीं देरी ॥

जय भैरव देवा…

पाँव घुँघरू बाजत अरु डमरू दम्कावत ।

बटुकनाथ बन बालक जल मन हरषावत ॥

जय भैरव देवा…

बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावे ।

कहे धरनी धर नर मनवांछित फल पावे ॥

जय भैरव देवा…

2. श्री भैरव आरती MP3 Song

आइए दोस्तों अब श्री भैरव आरती का MP3 सॉन्ग सुनते हैं। श्री भैरव आरती का MP3 सॉन्ग सुनने के लिए निश्चय क्लिक करें :-

3. श्री भैरव देव जी की आरती – English में

Jai Bhairav Deva, Prabhu Jai Bhairav Deva.

Jai Kali Aur Gaura devi Karat Seva॥

Jai Bhairav Deva…

Tumhi Aap Uddharak, Dukh Sindhu Taarak.

Bhakto Ke Sukh Karak, Bheeshan Vapu Dharak.

Jai Bhairav Deva…

Vaahan Shvaan Viraajat, Kar Trishul Dhari.

Mahima Amit Tumhari, Jai Jai Bhayahari.

Jai Bhairav Deva…

Tum Bin Devaa Pujan, Safal Nahi Hove.

Chaumukha Deepak, Darshak Dukh Khove.

Jai Bhairav Deva…

Tail Chatik Dadhi Mishrit, Bhashavali Teri.

Kripa Kariye Bhairav, Kariye Nahi Deri.

Jai Bhairav Deva…

Paanv Ghungharoo Baajat, Aaru Damaru Jamakavat.

Batuknath Ban Balakjan Man Harashavat.

Jai Bhairav Deva…

Batuknath Ki Aarati, Jo Koi Nar Gave.

Kahe Dharanidhar, Nar Manvanchit Phal Pave.

Jai Bhairav Deva…

4. श्री भैरव चालीसा

।।दोहा।।

श्री गणपति, गुरु गौरि पद, प्रेम सहित धरि माथ ।

चालीसा वन्दन करौं, श्री शिव भैरवनाथ ।।1

श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल ।

श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल ।।2

।।चौपाई।।

जय जय श्री काली के लाला ।

जयति जयति काशी-कुतवाला ।।1

जयति “बटुक भैरव” भय हारी ।

जयति “काल भैरव” बलकारी ।।2

जयति “नाथ भैरव” विख्याता ।

जयति “सर्व भैरव” सुखदाता ।।3

भैरव रूप कियो शिव धारण ।

भव के भार उतारण कारण ।।4

भैरव रूप सुनि ह्वै भय दूरी ।

सब विधि होय कामना पूरी ।।5

शेष महेश आदि गुण गायो ।

काशी-कोतवाल कहलायो ।।6

जटाजूट शिर चन्द्र विराजत ।

बाला, मुकुट, बिजायठ साजत ।।7

कटि करधनी घुंघरु बाजत ।

दर्शन करत सकल भय भाजत ।।8

जीवन दान दास को दीन्हो ।

कीन्हो कृपा नाथ तब चीन्हो ।।9

वसि रसना बनि सारद-काली ।

दीन्यो वर राख्यो मम लाली ।।10

धन्य धन्य भैरव भय भंजन ।

जय मनरंजन खल दल भंजन ।।11

कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा ।

कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोड़ा ।।12

जो भैरव निर्भय गुण गावत ।

अष्टसिद्धि नवनिधि फल पावत ।।13

रूप विशाल कठिन दुख मोचन ।

क्रोध कराल लाल दुहु लोचन ।।14

अगणित भूत प्रेत संग डोलत ।

बं बं बं शिव बं बं बोलत ।।15

रुद्रकाय काली के लाला ।

महा कालहुं के हो काला ।।16

बटुक नाथ हो काल गंभीरा ।

श्वेत, रक्त अरु श्याम शरीरा ।।17

करत तीनहुं रूप प्रकाशा ।

भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा ।।18

रत्न जड़ित कंचन सिंहासन ।

व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन ।।19

तुमहि जाई काशिहिं जन ध्यावहिं ।

विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं ।।20

जय प्रभु संहारक सुनन्द जय ।

जय उन्नत हर उमानन्द जय ।।21

भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय ।

बैजनाथ श्री जगतनाथ जय ।।22

महाभीम भीषण शरीर जय ।

रुद्र त्र्यम्बक धीर वीर जय ।।23

अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय ।

श्वानारूढ़ सयचन्द्र नाथ जय ।।24

निमिष दिगम्बर चक्रनाथ जय ।

गहत अनाथन नाथ हाथ जय ।।25

त्रेशलेश भूतेश चन्द्र जय ।

क्रोध वत्स अमरेश नद जय ।।26

श्री वामन नकुलेश चण्ड जय ।

कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ।।27

रुद्र बटुक क्रोधेश काल धर ।

चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ।।28

करि मद पान शम्भु गुण गावत ।

चौंसठ योगिन संग नचावत ।।29

करत कृपा जन पर बहु ढंगा ।

काशी कोतवाल अड़बंगा ।।30

देयं काल भैरव जब सोटा ।

नसै पाप मोटे से मोटा ।।31

जाकर निर्मल होय शरीरा ।

मिटे सकल संकट भव पीरा ।।32

श्री भैरव भूतों के राजा ।

बाधा हरत करत शुभ काजा ।।33

ऎलादी के दु:ख निवारयो ।

सदा कृपा करि काज सम्हारयो ।।34

सुन्दरदास सहित अनुरागा ।

श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ।।35

श्री भैरवजी की जय” लेख्यो ।

सकल कामना पूरण देख्यो ।।36

।।दोहा।।

जय जय जय भैरव बटुक, स्वामी संकट टार ।

कृपा दास पर कीजिए, शंकर के अवतार ।।1

जो यह चालीसा पढ़े, प्रेम सहित शत बार ।

उस घर सर्वानन्द हों, वैभव बढ़े अपार ।।2

दोस्तों आज के लेख में हमने श्री भैरव देव जी की आरती व चालीसा पाठ जाना।

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