Hanuman Chalisa: जानिए श्री हनुमान चालीसा के बारे में सबकुछ

हनुमान चालीसा लिरिक्स हिंदी व अंग्रेजी में तथा इसके नुकसान व फायदे साथ में बहुत सारे रोचक जानकारियां, डाउनलोड MP3 रिंगटोन व विडियो । आइए जानते हैं आज के लेख में क्या क्या जानेंगे :-

  1. श्री हनुमान चालीसा से जुड़े रोचक तथ्य
  2. हनुमान चालीसा लिरिक्स – हिंदी में
  3. श्री हनुमान चालीसा MP3 Song
  4. श्री हनुमान अमृतवाणी – विडियो
  5. श्री हनुमान चालीसा – अंग्रेजी में
  6. श्री हनुमान चालीसा रिंगटोन डाउनलोड
  7. श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स विडियो

1. हनुमान चालीसा से जुड़े रोचक जानकारियां

A. हनुमान चालीसा क्या है ?

B. इस का पाठ कब करना चाहिए ?

C. हनुमान चालीसा का पाठ कैसे करें, कितने बार करें ?

D. हनुमान चालीसा का फल क्यों नहीं मिलता है ?

E. हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या नुक़सान होता है ?

F. क्या लड़कियां हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं, महिलाएं इस का पाठ कैसे करें ?

A. हनुमान चालीसा क्या है ?

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा लिखित काव्य रचना है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसकी रचना अवधि भाषा में किया है। इस की संपूर्ण रचना में तीन दोहे व चालीस चौपाई है। तीनों दोहे स्तुति रुप में है। हनुमान चालीसा में चालीसा शब्द का अभिप्राय चालीस चौपाइयों से है।

हनुमान चालीसा के संपूर्ण रचना में श्री हनुमान जी की स्तुति, भावपूर्ण वंदना व हनुमान जी के शौर्य, पराक्रम का वर्णन मिलता है। इसमें उनके महिमा व महानता का वर्णन किया गया है।
हनुमान चालीसा का नियमित पूर्ण श्रद्धा के साथ पाठ करने से मनुष्य के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन देखने को मिलता है।

कलयुग में हनुमान चालीसा को सबसे शक्तिशाली माना जाता है। ‌हनुमान चालीसा को दुनिया में सबसे ज्यादा बार पढ़ी जाने वाली पुस्तिका माना गया है।

B. हनुमान चालीसा का पाठ कब करना चाहिए ?

हनुमान चालीसा का पाठ कब करना चाहिए, इस वाक्य में दो सवाल छुपा है। आइए दोनों ही सवालों पर विचार करते हैं :-

१. हनुमान चालीसा का पाठ कब करना चाहिए अर्थात किस समय करना चाहिए ?

हनुमान चालीसा के पाठ के लिए सुबह ब्रम्हमुहूर्त व सायंकाल गोधुलि का समय सर्वोत्तम माना गया है। इस समय वातावरण शांत रहता है, पूजा व चालीसा पाठ में ध्यान लगता है।

२. हनुमान चालीसा का पाठ कब करना चाहिए अर्थात किस स्थिति में करना चाहिए ?

जब भी कोई विकट परिस्थिति आये या किसी प्रकार की संकट उत्पन्न होने पर हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है।

जब भी कोई रोग शोक आये, अनजाना भय सताये, भूत प्रेत की बाधा आये , तो उस स्थिति में यह चालीसा का पाठ करें।

संकट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।।36

नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।25

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।

महाबीर जब नाम सुनावै ।।24

C. हनुमान चालीसा का पाठ कैसे करें , कितने बार करें ?

आइए अब श्री हनुमान चालीसा पाठ करने की विधि जानते हैं साथ में यह भी जानते हैं कि चालीसा का पाठ कितने बार करना चाहिए :-

  • सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर ले। साफ वस्त्र धारण करें।
  • लाल वस्त्र का आसन बनाकर उसमें भगवान श्रीराम व श्री हनुमानजी की मूर्ति या तस्वीर को विराजित करें ( स्थापित करें )।
  • तत्पश्चात श्री राम व श्री हनुमानजी के सम्मुख स्वयं भी लाल वस्त्र धारण कर कुशा या ऊन के आसन में बैठे। ध्यान रहे पूर्व दिशा या दक्षिण दिशा में मुंह करके बैठना है और पूजा आराधना करना है। इसी के अनुरूप श्री राम व हनुमानजी की मूर्ति स्थापित करें।
  • श्री राम व हनुमानजी के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं। अगर गाय का घी उपलब्ध ना हो तो तिल के तेल या चमेली के तेल से भी दीपक जला सकते हैं।
  • एक लोटा जल रखें। पहले भगवान श्री राम जी की पूजा करें उसके बाद श्री वीर हनुमान का पूजा करें।
  • श्री हनुमानजी के सामने कम से कम तीन बार से लेकर 108 बार तक हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • पूजा व चालीसा पाठ के बाद गुड़ या बुंदी के लड्डू का भोग लगाएं।
  • इस विधि से पुजा व हनुमान चालीसा का पाठ करें। मंगलवार या शनिवार से शुरू करें। ऐसा कम से कम ग्यारह मंगलवार तक करें या नियमित रूप से करें।

D. हनुमान चालीसा का फल क्यों नहीं मिलता ?

हनुमान चालीसा का पाठ निर्मल मन व पूर्ण श्रद्धा के साथ नहीं करने से चालीसा पाठ का फल नहीं मिलता है। कोई फायदा नहीं होगा।

आइए जानते हैं और ऐसी कौन कौन से कारण हैं जिनके वजह से हनुमान चालीसा के पाठ का मनवांछित फल  नहीं मिलता है :-

  • हनुमान चालीसा का पाठ हमेशा नहा धोकर व साफ सुथरा कपड़ा पहनकर करें।
  • चालीसा पाठ के अवधि में सदा मांस मदिरा से दूर रहें।
  • बहुत से व्यक्ति जमीन पर बैठकर पाठ करते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ कुशा या ऊन की चादर पर बैठकर करना चाहिए। जमीन पर बैठकर पाठ करने से मनवांछित फल नहीं मिल पाता है।
  • यदि किसी रजस्वला महिला के संपर्क में आए हैं या उनका दिया सामान इस्तेमाल किए हैं तो पुनः नहा धोकर चालीसा का पाठ करें। क्योंकि हनुमान जी ब्रह्मचारी थे। ऐसा नहीं करने से हनुमान जी नाराज हो सकते हैं।
  • हनुमान चालीसा के पाठ का पूर्ण लाभ तभी मिल पाएगा जब आप लाल वस्त्र धारण कर चालीसा का पाठ करेंगे।
  • कई लोग हनुमान चालीसा या कोई भी पूजा आराधना किसी के कहने से चालू कर लेते हैं और सही विधि पूर्वक करते हैं लेकिन सही ध्यान और पूर्ण श्रद्धा के साथ नहीं करते हैं। उनका शरीर तो पूजा में बैठा रहता है लेकिन उनका ध्यान कहीं और रहता है। ऐसे में हनुमान चालीसा के पाठ का फायदा नहीं मिल पाता है।

E. हनुमान चालीसा पढ़ने के नुक़सान

दोस्तों अभी तक आपने हनुमान चालीसा पढ़ने के फायदे के बारे में सुना होगा। आइए आज यहां पर मैं आपको हनुमान चालीसा पढ़ने के नुकसान के बारे में बताऊंगा।

दोस्तों यहां पर मैं अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करूंगा। मैं पिछले 20 वर्षों से श्री हनुमान चालीसा का पाठ करते आ रहा हूं। पहले मैं इस का पाठ नियमित रूप से करता था। पर अब समय अभाव के कारण नियमित नहीं कर पाता हूं। मुझे अभी तक श्री हनुमान चालीसा के पाठ से कोई भी हानि या नुकसान नहीं मिला है।

आइए अब श्री हनुमान चालीसा के पाठ से होने वाले नुकसान के बारे में बात करते हैं। सामान्य जीवन में पूर्ण श्रद्धा व निर्मल मन से इस का पाठ करने से कोई नुकसान नहीं होता है।

परंतु मैंने कई लोगों को देखा है जो तांत्रिक सिद्धि के लिए श्री हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। इनका उद्देश्य निर्मल नहीं रहता है। ऐसे में छोटी सी चूक से भी नुकसान हो जाता है। मैंने ऐसे कई लोगों को पागल या बावला होते देखा है।

इसलिए श्री हनुमान चालीसा का पाठ बुरे कार्यों के लिए या बुरे उद्देश्य से ना करें, इसमें नुकसान ही होगा।

F. क्या लड़कियां भी हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं ? महिलाएं हनुमान चालीसा का पाठ कैसे करें ?

क्या लड़कियां या महिलाएं हनुमान चालीसा का पाठ या हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं – उत्तर है हां ।

क्या सभी महिलाएं पुरुषों की भांति हनुमान जी की पूजा आराधना या हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं – उत्तर है नहीं।

दोस्तों अभी मैंने उत्तर एक बार हां में दिया और एक बार नहीं में। ऐसा किसलिए, इसका जवाब आपको आगे मिलेगा।

कलयुग में हनुमान जी को जागृत देवता माना जाता है। इसलिए इनके पुजा से भक्तों की मनोकामना शीघ्र ही पुरा होता है। भक्त निर्भय हो जाता है, उन्हें किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता।

श्री हनुमान जी अखंड ब्रह्मचारी व महायोगी थे। वे महिलाओं को सदा माता के रूप में देखते थे। इसलिए हनुमानजी की उपासना में ब्रम्हचर्य व इंद्रिय संयम पर ध्यान देना चाहिए।

हमारे हिंदू धर्म में किसी भी देवी-देवता के पुजा का अधिकार महिलाओं एवं पुरुषों को सामान रुप से है। परंतु हनुमान जी के पुजा का अधिकार महिलाओं एवं पुरुषों को एक सामान नहीं है। हनुमानजी की पूजा आमतौर पर पुरुष लोग करते हैं , महिलाओं के लिए कई नियम है क्योंकि हनुमान जी ब्रम्हचारी थे तथा महिलाओं को सदा माता के रूप में देखते थे।
स्त्रियों को अपने आगे झुकना हनुमानजी को नहीं भाता है, क्योंकि वह स्त्री वर्ग को नमन करते हैं। इसलिए हनुमानजी की पूजा में कई ऐसे कार्य है जिसे महिलाओं को नहीं करनी चाहिए।

आइए जानते हैं महिलाएं हनुमान जी की पूजा में कौन से कार्य कर सकती हैं और कौन से नहीं।

महिलाएं हनुमान जी की पूजा में यह कार्य कर सकती हैं :-

महिलाएं हनुमान जी को गूगुल की धुनी रमा सकती हैं।

महिलाएं हनुमान जी के सामने दीपक जला सकते हैं।

महिलाएं अपने हाथों से भोग प्रसाद बनाकर हनुमानजी को अर्पित कर सकती हैं।

महिलाएं सुंदरकांड , हनुमान चालीसा , हनुमानाष्टक का पाठ कर सकती हैं।

महिलाएं हनुमान जी की पूजा में यह कार्य नहीं कर सकती हैं :-

महिलाएं लंबे अनुष्ठान नहीं कर सकती हैं। इसके पीछे उनका मासिक धर्म या रजस्वला होना है और घरेलू उत्तरदाय़ित्व निभाना मुख्य कारण है।

महिलाएं मासिक धर्म के दौरान हनुमान जी से संबंधित कोई भी कार्य न करे

महिलाएं हनुमान जी को चोला नहीं चढ़ा सकती है।

महिलाएं हनुमान जी को सिंदूर अर्पित नहीं कर सकती हैं।

महिलाएं बजरंग बाण का पाठ नहीं कर सकती हैं।

महिलाओं को हनुमान जी को चरण पादुका अर्पित नहीं करनी चाहिए।

महिलाएं हनुमान जी को पंचामृत स्नान नहीं करा सकती हैं।

महिलाएं हनुमान जी को कपड़ों का जोड़ा अर्पित नहीं कर सकती हैं।

महिलाएं हनुमान जी को जनेऊ ( यज्ञोपवीत ) अर्पित नहीं कर सकती हैं।

2. श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स – हिंदी में

दोहा

श्री गुरुचरण सरोज रज , निज मन मुकुरु सुधारि ।

बरनऊॅ रघुबर विमल जसु , जो दायक फल चारि ।।1

बुद्धिहीन तनु जानि के , सुमिरौं पवन-कुमार ।

बल बुधि विद्या देहु मोहिं , हरहु कलेस बिकार ।।2

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

जय कपीश तिहुॅ लोक उजागर ।।1

राम-दुत अतुलित बलधामा ।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ।।2

महाबीर विक्रम बजरंगी ।

कुमति निवार सुमति के संगी ।।3
कंचन बरण बिराज सुबेसा ।

कानन कुण्डल कुंचित केसा ।।4

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।

कॉधे मूॅज जनेऊ साजै ।।5

शंकर-सुवन केशरी-नंदन ।

तेज प्रताप महा जग-वंदन ।।6

विद्यावान गुनी अति चातुर ।

राम काज करिबे को आतुर ।।7

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम लखन सीता मन बसिया ।।8

सुक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

बिकट रूप धरि लंक जरावा ।।9

भीम रूप धरि असुर संहारे ।

रामचंद्र के काज संवारे ।।10

लाय सजीवन लखन जियाये ।

श्री रघुबीर हरषि उर लाये ।।11

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।।12

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ।।13

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

नारद सारद सहित अहीसा ।।14
जम कुबेर दिगपाल जहां ते ।

कबि कोबिद कहि सके कहां ते ।।15

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।

राम मिलाय राज पद दीन्हा ।।16

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना ।

लंकेस्वर भए सब जग जाना ।।17

जुग सहस्र योजन पर भानू ।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।।18

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ।।19

दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।।20

राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।।21

सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।

तुम रक्षक काहू को डर ना ।।22

आपन तेज सम्हारो आपै ।

तीनों लोक हांक तें कांपै ।।23

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।

महाबीर जब नाम सुनावै ।।24

नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।25

संकट तें हनुमान छुड़ावै ।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ।।26

सब पर राम तपस्वी राजा ।

तिन के काज सकल तुम साजा ।।27

और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोइ अमित जीवन फल पावै ।।28
चारों जुग परताप तुम्हारा ।

है परसिद्ध जगत उजियारा ।।29

साधु-संत के तुम रखवारे ।

असुर निकंदन राम दुलारे ।।30

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।

अस बर दीन जानकी माता ।।31

राम रसायन तुम्हरे पासा ।

सदा रहो रघुपति के दासा ।।32

तुम्हरे भजन राम को पावै ।

जनम जनम के दुख बिसरावै।।33

अंतकाल रघुबर पुर जाई ।

जहां जन्म हरि-भक्त कहाई ।।34

और देवता चित्त न धरई ।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ।।35

संकट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।।36

जै जै जै हनुमान गोसाईं ।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ।।37

जो सत बार पाठ कर कोई ।

छुटहि बंदि महा सुख होई ।।38

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

होय सिद्धि साखी गौरीसा ।।39

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय मंह डेरा ।।40

दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।।

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