हनुमान जी की 3 पत्नीयां कौन है? जानिए सच क्या है ?

अभी तक हम सभी हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी के रूप में जानते आए हैं। हनुमान जी के विवाहित होने की बात बहुत कम लोग जानते हैं। अगर हनुमान जी विवाहित हैं तो फिर वह बाल ब्रह्मचारी कैसे कहलाते हैं?

श्री हनुमान जी के विवाहित होने का उल्लेख श्रीरामचरितमानस या रामायण में नहीं मिलता है, तो फिर इसका उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है। अगर हनुमान जी के तीन पत्नियां हैं तो वह कौन कौन है? इसका क्या प्रमाण है। आइए जानते हैं :-

सबसे पहले हम आपको उनके पहले पत्नी के बारे में जानकारी देंगे जो एक विद्वान एवं तपस्वी थी।

हनुमान जी का पहला पत्नी कौन है? इनके विवाहित होने का उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है? इसका प्रमाण क्या है?




हनुमान जी के विवाहित होने का उल्लेख पाराशर संहिता में बताया गया है। इसका प्रमाण कहे तो तेलंगाना में इसका मंदिर है। तेलंगाना के मंदिर में हनुमान जी अपने पत्नी के साथ विराजमान हैं। यह प्राचीन दुर्लभ मंदिर जहां हनुमान जी और उनके पत्नी का प्रतिमा स्थापित है, यह तेलंगाना के खम्मम जिला में येल्नाडू गांव में स्थित है। इस मंदिर में दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। यह हैदराबाद से करीब 220 किलोमीटर की दूरी पर है तथा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां तक पहुंचने के लिए आवागमन की पर्याप्त सुविधा है।

हनुमान जी व उनकी पत्नी का दर्शन इस मंदिर में करने से क्या लाभ मिलता है?

यहां दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां के दर्शन से दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। यदि पति पत्नी के बीच किसी प्रकार की अनबन है दोनों में तनाव हैं झगड़ा हो रहे हैं या दोनों के बीच में किसी प्रकार की समस्या है तो वह समस्या दूर होती है। अगर तलाक की नौबत आ रही है तो उसमें भी सुधार होती है।



यहां लोग मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं और अपने बेहतर दांपत्य जीवन की कामना रखते हैं। अगर पति पत्नी में किसी प्रकार की अनबन है तो वे हनुमान जी के समक्ष अचछे से जीवन व्यतीत करने का वादा करते हैं।



यह वादा पति पत्नी दोनों को निभाना होता है। जो भी इस वादे का उल्लंघन करता है उसका बहुत बुरा होता है। उनके दर्शन के बाद पति या पत्नी जो भी विवाद की शुरुआत करते हैं उसका बुरा होता है।

हनुमान जी का पत्नी कौन है उनका क्या नाम है?

हनुमान जी की पत्नी का नाम सूवर्चला है। वह सूर्य देव की बेटी है। वह बहुत विद्वान एवं तपस्वी थे। हनुमान जी से विवाह के पहले वह तपस्या में लीन थे। भगवान श्री सूर्य देव जी के कहने पर वह हनुमान जी से विवाह किया था।
हनुमान जी को सुवर्चला से शादी किन परिस्थितियों में करना पड़ा? हनुमान जी विवाहित होने के उपरांत भी अकेले कैसे रहें? कैसे बाल ब्रह्मचारी ही बने रहे, इस सवाल का जवाब आपको आगे मिलेगा।

हनुमान जी ब्रम्हचारी है फिर उन्हें विवाह क्यों करना पड़ा?




महाराज केसरी एवं माता अंजना श्री हनुमान जी के माता पिता हैं। उन्होंने अपने विद्या अध्ययन सूर्य लोक में भगवान सूर्य नारायण के पास प्राप्त किया है। सूर्यनारायण उनके गुरुदेव हैं। उन्होंने शास्त्र विद्या शस्त्र विद्या धनुर्विद्या गदा विद्या सभी प्रकार की विद्याएं उन्होंने सूर्य देव जी से प्राप्त किए हैं।



जिस समय भगवान राम मुनीराज वशिष्ठ जी के पास से विद्या अध्ययन कर रहे थे, उस समय हनुमान जी सूर्य लोक में सूर्य देव जी के पास विद्या अध्ययन कर रहे थे। उन्होंने संगीत की विद्या श्री नारद मुनि से प्राप्त किए हैं। श्री नारद जी उनके संगीत गुरु हैं।



हनुमान जी सभी प्रकार की विद्याएं सीखना चाहते थे। वे अपनू गुरुदेव श्री सूर्य देव जी से सभी प्रकार की विद्याएं पूरी लगन एवं निष्ठा से सिख रहे थे। सूर्यदेव भी उन्हें सभी विद्या पूरी निष्ठा पूर्वक सिखा रहे थे।

हनुमान जी को ज्ञान विद्या देते समय एक बार श्री सूर्य देव जी के सामने बहुत बड़ा धर्म संकट खड़ा हो गया। नौ प्रकार की विधाएं होती है उसमें से सूर्य देव जी श्री हनुमान जी को पांच प्रकार की विद्याएं सिखा चुके थे। शेष बचे चार विद्या एवं ज्ञान ऐसे थे जिन्हें किसी विवाहित को ही सिखाया जा सकता था। इन 4 विद्याओं को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति का विवाहित होना अनिवार्य था।

हनुमान जी ब्रह्मचारी थे परंतु वह सभी विद्या प्राप्त करने का प्रण ले चुके थे, वह कम विद्या में मानने को तैयार नहीं थे। अब सूर्य देव जी के सामने धर्म संकट उत्पन्न हो गया था क्योंकि वह धर्म के विरुद्ध किसी अविवाहित को उन 4 विशेष विद्याओं को नहीं बता सकते थे। ऐसी स्थिति में सूर्य देव जी श्री हनुमान जी को विवाह करने की सलाह देते हैं।

पूर्ण विद्या प्राप्त करने की अपने प्रण को पूरा करने के लिए हनुमान जी विवाह करने के लिए राजी हो जाते हैं। अब बात यह आती है कि वह विवाह किससे करेंगे। हनुमान जी के लिए योग्य वधु कौन हो और वह कहां मिलेंगीं।

काफी सोच विचार के बाद श्री सूर्य देव जी हनुमान जी के लिए वधु के रूप में अपनी बेटी सूवर्चला से विवाह की बात सोचते हैं। हनुमान जी को अपनी बेटी सुवर्चला से विवाह करने के लिए कहते हैं। सुवर्चला उस समय तपस्या में लीन थे। हनुमान जी सूवर्चला से शादी करने के लिए तैयार हो जाते हैं।



सूर्यनारायण श्री हनुमान जी का विवाह सुवर्चला से करा देते हैं। शादी के बाद सुवर्चला फिर से सदा के लिए तपस्या में लीन हो गए। भगवान सूर्यनारायण अब बाकी के सभी 4 विद्याएं हनुमान जी को सिखाते हैं।

इस प्रकार हनुमान जी शादी करने के बाद भी बाल ब्रह्मचारी ही रहे।

हनुमान जी की दूसरी और तीसरी पत्नी कौन है?

अभी हमने ऊपर जाना की हनुमान जी को देवी सुवर्चला से विवाह कुछ विशेष परिस्थिति वश करना पड़ा था। उनकी दूसरी और तीसरी विवाह भी ऐसी ही कुछ विशेष परिस्थिति वश उन्हें करना पड़ा था।



उनके दुसरी पत्नी का नाम अनंगकुसूमा है और वह महाराज रावण की दुहिता है। उनकी तीसरी पत्नी का नाम सत्यवती है और वह वरुण देव की पुत्री है। इनका वर्णन पउमचरित नामक ग्रंथ में मिलता है। इस कहानी को पुरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

Disclaimer – रामचरितमानस और रामायण में हनुमान जी के विवाहित होने या उनके 3 पत्नीयां होने का उल्लेख नहीं है। यह उल्लेख पाराशर संहिता व पउमचरित नामक ग्रंथ में देखने को मिलता है। हमने यह लेख पाठकों की जानकारी के लिए लिखा है।

हनुमान जी के विवाहित होने या उनके 3 पत्नीयां होने का दावा हम नहीं करते हैं। इसलिए पाठक अपने विवेक से निर्णय लेवें।

दोस्तों अभी हमने श्री हनुमान जी को कैसे परिस्थिति वश तीन विवाह करने पड़े और इसके बावजूद भी वह बाल ब्रह्मचारी ही हैं इस बात को जाना। ऐसे ही रोचक जानकारियों को जानने के लिए यहां क्लिक करें।

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