श्री ललिता सहस्त्रनाम पढ़ने के 34 अद्भुत चमत्कारिक फायदे व लाभ

श्री ललिता सहस्त्रनाम पढ़ने से अनेकों लाभ मिलता है। कहते हैं श्री ललिता सहस्त्रनाम के पाठ से इस धरा धाम में कुछ भी असंभव नहीं है। तो आइए जानते हैं श्री ललिता सहस्त्रनाम के पाठ से होने वाले कुछ विशेष लाभों के बारे में। अगर आप ललिता माता कौन है, इनकी उत्पत्ति कैसे हुई ? यह नहीं जानते तो यह जानने के लिए यहां क्लिक करें

1. श्री ललिता सहस्त्रनाम पढ़ने के फायदे व लाभ

1. श्री ललिता सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ सच्चे मन से करने से साधक की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

2. श्री ललिता सहस्त्रनाम के पाठ से सभी प्रकार के रोग व्याधि दूर होते हैं। व्यक्ति निरोगी जीवन व्यतीत करता है।



3. इसके नियमित पाठ से व्यक्ति लम्बी उम्र प्राप्त करता है। वह दिर्घायु बनता है।

4. यदि किसी व्यक्ति को बुखार है, तो उसके सिर पर हाथ रखकर ललिता सहस्त्रनाम का पाठ करने से व्यक्ति का बुखार दूर होती है।

5. श्री ललिता सहस्त्रनाम से अभिमंत्रित किया हुआ भस्म को शरीर पर लगाने से सभी प्रकार के रोगों में लाभ मिलता है।

6. श्री ललिता सहस्त्रनाम से अभिमंत्रित किया हुआ जल पीने से भी सभी प्रकार के शारीरिक मानसिक कष्ट दूर होते हैं। शरीर की पीड़ा दूर होती है।

7. यदि किसी व्यक्ति पर भूत प्रेत की बुरी साया है, तो उसके ऊपर श्री ललिता सहस्त्रनाम से अभिमंत्रित किया हुआ जल का छिड़काव करने से उसके ऊपर से भूत प्रेत की बुरी साया दूर होती है।

8. सर्प ततैया आदि के काटने से उत्पन्न विष पीड़ा पंचोपचार पूजन करके श्री ललिता सहस्त्रनाम पाठ को सुनाने से उतर जाता है।



9. यदि कोई बांझ महिला है, उसे ललिता सहस्त्रनाम से अभिमंत्रित किया हुआ माखन खिलाने से वह शीघ्र गर्भ धारण करती है।

10. श्री ललिता सहस्त्रनाम का नित्य प्रति पाठ करने से उस व्यक्ति में स्वतः ही सम्मोहन शक्ति उत्पन्न हो जाती है। जिससे उनका समाज में प्रभाव बढ़ता है।



11. श्री ललिता सहस्त्रनाम के नियमित पाठ से शत्रुओं का नाष होता है। शत्रु पर विजय प्राप्ति होती है।

12. श्री ललिता सहस्त्रनाम का पाठ प्रतिदिन 3 माह तक तीन बार पाठ करने से जिव्हा पर सरस्वती विराजमान होती हैं, जिससे व्यक्ति विद्वान बनता है।

13. श्री ललिता सहस्त्रनाम का पाठ प्रतिदिन छः माह तक करने से मां लक्ष्मी उस साधक के घर में स्थिर हो जाती है, जिससे गरीबी दूर होती है।



14. श्री ललिता सहस्त्रनाम के पाठ करने वाले साधक की संगति में रहने से उनका भी पाप नाष होने लगता है। उसमें सद्आचरण आने लगता है। श्री ललिता सहस्त्रनाम के प्रभाव से दुराचारी व्यक्ति भी सदाचारी बन जाता है।

15. जो व्यक्ति सच्चे मन से श्री ललिता सहस्त्रनाम का पाठ करता है, उसे सदाचारी संतान की प्राप्ति होती है।

16. जो इस सहस्त्रनाम का पाठ सच्चे मन से करता है उसे मृत्यु पश्चात मुक्ति की प्राप्ति होती है। उन्हें अनेक योनियों में भटकना नहीं पड़ता है।

17. इस सहस्त्रनाम का पाठ करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती है।

18. जो धनकामी है उसे धन की प्राप्ति होती है।

19. श्री ललिता सहस्त्रनाम का पाठ विद्यार्थीयों के लिए भी बहुत लाभदायक है। उन्हें विद्या अध्ययन में मनवांछित सफलता प्राप्त होती है।

20. जो व्यक्ति यशकामी है, वह यश प्राप्त करता है। समाज में उनका मान सम्मान बढ़ता है।

21. श्री ललिता सहस्रनाम का जप अपने में ही एक पूजा विधि है। यह मन को शुद्ध करता है और चेतना का उत्थान करता है।

22. श्री ललिता सहस्त्रनाम के पाठ से चंचल मन शांत होता है। एकाग्रता आती है। मन का भटकना रुक जाती है। यह विश्राम का सामान्य रूप है। इससे शांति की अनुभूति होती है।

23. जब सच्चे मन से पाठ किया जाता है तो हमारी चेतना शुद्ध होती है। हमारा मन सकारात्मकता, क्रियाशीलता और उल्लास से भर जाता है।

24. तीर्थ स्थल जाने से, पवित्र नदियों में स्नान करने से तथा दान करने से जो पुण्य की प्राप्ति होती है, वह श्री ललिता सहस्त्रनाम के पाठ से मिल जाता है। जो लोग यह सब नहीं कर सकते उन्हें श्री ललिता सहस्त्रनाम का पाठ अवश्य करनी चाहिए।

25. यदि किसी पूजा पाठ में गलती हो जाती है, तो इसका दोष लगता है। इसका नकारात्मक परिणाम मिलता है। श्री ललिता सहस्त्रनाम के पाठ से पूजा विधि में हुई गलती का दोष दूर होता है।



26. श्री ललिता सहस्त्रनाम के पाठ से अकाल मृत्यु व दुर्घटना का भय दूर होती है। इसलिए इसे जीवनदायिनी भी कहा जाता है। व्यक्ति लम्बी उम्र प्राप्त करता है।

लेकिन इस बात का सदा ध्यान रखें कि लापरवाही कभी भी क्षमा योग्य नहीं है। आप लापरवाही पुर्वक वाहन चलाकर दुर्घटना का शिकार होंगे या लापरवाही पुर्वक खान-पान रखकर बीमारियों का शिकार होंगे, इसका जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।

27. ललिता सहस्त्रनाम का पाठ करते समय अपने दिमाग व मन-मस्तिष्क में मां ललिता की अमृत के समुद्र में बैठी हुई प्रतिमा की कल्पना करें। इससे सभी प्रकार के रोगों से छुटकारा मिलती है।



28. संतान प्राप्ति के इच्छुक व्यक्ति को श्री ललिता सहस्त्रनाम का पाठ करते समय अपने सामने शुद्ध घी रखनी चाहिए। पाठ समाप्त होने के उपरांत यह घी खा लें। इससे नपुंसकता दूर होती है और उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। जिन व्यक्तियों को संतान प्राप्ति में परेशानियां आ रही है, उन्हें यह प्रयोग अवश्य करनी चाहिए।

29. ललिता सहस्त्रनाम के पाठ करने से वाक सिद्धि की प्राप्त होती है। इससे व्यक्ति प्रसिद्धि हासिल करता है। उनका नाम चारों ओर सितारों की तरह चमक उठता है।

30. हमारे सनातन धर्म में ललिता सप्तमी व्रत का व‍िशेष महत्‍व है। यह व्रत संतान प्राप्ति या संतान की लम्बी उम्र के लिए रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत के दौरान श्री ललिता सहस्त्रनाम का पाठ करने से जीवन में कभी पैसों की तंगी नहीं होती है। साथ ही गंभीर से गंभीर परेशानियाें में भी राहत मिलती है।



31. मां ललिता दस महाविद्याओं में एक हैं। मां काली के 2 रूप कृष्णवर्णा और रक्तवर्णा में मां ललिता रक्तवर्णा स्वरूप है। मां ललिता धन ऐश्वर्य और भोग की अधिष्ठात्री देवी है। बाकी अन्य महाविद्याओं में कोई भोग तो कोई मोक्ष में विशेष प्रभावी है, लेकिन ललिता माता भोग और मोक्ष दोनों समान रूप से प्रदान करती हैं।

32. श्री ललिता सहस्त्रनाम के पाठ से शनि, राहू केतु जैसे बुरे ग्रहों की दशा दूर होती हैं। नज़र दोष व काले जादू से भी बचाती है।

33. शुक्रवार के दिन इसका पाठ करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती है। व्यक्ति को अपने जीवन की मूलभूत जरूरतों के लिए परेशान होना नहीं पड़ता है।

34. श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ एक अरब बार करने से जीतने पुण्य की प्राप्ति होती है, उतने पुण्य की प्राप्ति श्री ललिता सहस्त्रनाम का एक बार पाठ करने से मिलती है।

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