Surya Chalisa: श्री सूर्य चालीसा व इसके चमत्कारिक लाभ

Surya Chalisa

श्री सूर्य चालीसा लिरिक्स हिंदी व अंग्रेजी में तथा इसे पढ़ने के चमत्कारिक लाभ। यहां पर हम आपको श्री सूर्य देव जी के दोनों चालीसा पाठ हिंदी व अंग्रेजी में जानेंगे। आइए आज के लेख में हम क्या क्या जानेंगे उसे क्रमवार जानते हैं :-

1. श्री सूर्य देव चालीसा

श्री सूर्य नारायण भगवान की दो चालीसा पढ़ने के उपलब्ध है। हम यहां पर आपको दोनों ही चालीसा बतायेंगे। आइए अब पहले चालीसा का पाठ देखते हैं, जिसका बोल है – कनक बदन कुण्डल मकर

॥दोहा॥

कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग।

पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥

॥चौपाई॥

जय सविता जय जयति दिवाकर ।

सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर ॥1

भानु पतंग मरीची भास्कर ।

सविता हंस सुनूर विभाकर ॥ 2

विवस्वान आदित्य विकर्तन ।

मार्तण्ड हरिरूप विरोचन ॥3

अम्बरमणि खग रवि कहलाते ।

वेद हिरण्यगर्भ कह गाते ॥ 4

सहस्त्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि ।

मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि ॥5

अरुण सदृश सारथी मनोहर ।

हांकत हय साता चढ़ि रथ पर ।।6

मंडल की महिमा अति न्यारी ।

तेज रूप केरी बलिहारी ॥7

उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते ।

देखि पुरन्दर लज्जित होते ॥8

मित्र मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर ।

सविता सूर्य अर्क खग कलिकर ॥9

पूषा रवि आदित्य नाम लै ।

हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै ॥10

द्वादस नाम प्रेम सों गावैं ।

मस्तक बारह बार नवावैं ॥11

चार पदारथ जन सो पावै ।

दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै ॥12

नमस्कार को चमत्कार यह ।

विधि हरिहर को कृपासार यह ॥13

सेवै भानु तुमहिं मन लाई ।

अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई ॥14

बारह नाम उच्चारन करते ।

सहस जनम के पातक टरते ॥15

उपाख्यान जो करते तवजन ।

रिपु सों जमलहते सोतेहि छन ॥16

धन सुत जुत परिवार बढ़तु है।

प्रबल मोह को फंद कटतु है ॥17

अर्क शीश को रक्षा करते ।

रवि ललाट पर नित्य बिहरते ॥18

सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत ।

कर्ण देस पर दिनकर छाजत ॥19

भानु नासिका वासकरहुनित ।

भास्कर करत सदा मुखको हित ॥20

ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे।

रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे ॥21

कंठ सुवर्ण रेत की शोभा ।

तिग्म तेजसः कांधे लोभा ॥22

पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर ।

त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर ॥23

युगल हाथ पर रक्षा कारन ।

भानुमान उरसर्म सुउदरचन ॥24

बसत नाभि आदित्य मनोहर ।

कटिमंह, रहत मन मुदभर ॥25

जंघा गोपति सविता बासा ।

गुप्त दिवाकर करत हुलासा ।।26

विवस्वान पद की रखवारी ।

बाहर बसते नित तम हारी ॥27

सहस्त्रांशु सर्वांग सम्हारै ।

रक्षा कवच विचित्र विचारे ॥28

अस जोजन अपने मन माहीं ।

भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥29

दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै ।

जोजन याको मन मंह जापै ॥30

अंधकार जग का जो हरता ।

नव प्रकाश से आनन्द भरता ॥31

ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही ।

कोटि बार मैं प्रनवौं ताही ॥32

मंद सदृश सुत जग में जाके ।

धर्मराज सम अद्भुत बांके ॥33

धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा ।

किया करत सुरमुनि नर सेवा ॥34

भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों ।

दूर हटतसो भवके भ्रम सों ॥35

परम धन्य सों नर तनधारी ।

हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी ॥36

अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन ।

मधु वेदांग नाम रवि उदयन ॥37

भानु उदय बैसाख गिनावै ।

ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै ॥38

यम भादों आश्विन हिमरेता ।

कातिक होत दिवाकर नेता ॥39

अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं ।

पुरुष नाम रविहैं मलमासहिं ॥40

॥दोहा॥

भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य ।

सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य ।।

2. श्री सूर्य चालीसा लिरिक्स – हिंदी में

दोस्तों जैसे कि हमने ऊपर बताया कि श्री सूर्य देव के 2 चालीसा पाठ है। आइए अब दूसरा चालीसा पाठ देखते हैं, जिसका बोल है – श्री रविहरत आ होरात

दोहा

श्री रविहरत आ होरात तमे, अगणित किरण पसारी ।

वंदन करू टन चरण म़ें, अर्घ देऊ जल धारी ।।1

सकल श्रीस्टी के स्वामी हो, सचराचर के नाथ ।

निसदिन होत हे तुमसे ही, होवत संध्या प्रभात ।।2

चौपाई

जय भगवान सूर्य तुमहारी।

जय खगेश दिनकर सुभकारी।।1

तुम हो श्रिस्टी के नेत्रा स्वरूपा।

त्रिगुण धारी त्रै वेद स्‍वरूपा।।2

तुम ही करता पालक संहारक।

भुवन चतुर्दश के संचालक।।3

सुन्दर वदन चतुर्भुज धारी।

रश्मी रती तुम गगन विहारी ।।4

चकरा शंख आरू स्वेट कमलधर ।

वरमुद्रा सोहत चोटेकार ।।5

शीश मुकट कुंडल गाल माला ।

चारू तिलक तव भाल विशाला ।।6

शाख्‍त अश्वा रात द्रुत गामी ।

अरुण सारथी गति अविरामी ।।7

राख्त वरण आभुसन धारक ।

अतिप्रिया तोहे लाल पदारथ ।।8

सर्वतमा काहे तुम्ही ऋग्वेदा ।

मेटरा काहे तुम को सब वेडा ।।9

पांच देव म़ें पूजे जाते ।

मन वंचित फल साधक पते ।।10

द्वादश नाम जाप आऔधरक ।

रोग शोक आरू कस्त निवारक ।।11

मया कुन्ती तव ध्यान लगायो ।

दानवीर सूट कारण सो पायो ।।12

राजा युधिस्ठिर तव जस गयो ।

अक्षय पटरा वो बन म़ें पायो ।।13

शास्त्रा त्याग अर्जुन अकुरयो ।

बन आदित्य हृदय से पायो ।।14

विन्द्याचल तब मार्ग म़ें आयो ।

हाहा कर तिमिर से छायो ।।15

मुनि अगस्त्य गिरि गर्व मीटायो ।

निजटक बन से विंध्या ना वयो ।।16

मुनि अगस्तय तव महिमा गयी ।

सुमिर भये विजयी रघुराई ।।17

तोहे विरोक मधुर फल जाना।

मुख म़ें लीन्ही तोहे हनुमाना ।।18

तव नंदन शनिदेव कहावे ।

पवन ते सूट शनी तीर मिटवे ।।19

यज्ना व्रत स्तुति तुम्हारी किन्ही ।

भेट शुक्ला यगुर्वेद की दीन्ही ।।20

सूर्यमुखी खरी तर तव रूपा।

कृष्णा सुदर्शन भानु स्वरूपा ।।21

नमन तोहे ओंकार स्वरूपा ।

नमन आत्मा आरू काल स्वरूपा ।।22

डिग-दिगंत तव तेज प्रकाशे ।

उज्ज्वल रूप तुमहि आकाशे ।।23

दस दिगपाल करत तव सुमिरन ।

आंजन नेत्रा करत हे सुमिरन ।।24

त्रिविध टाप हारता तुम भगवान ।

ज्ञान ज्योति करता तुम भगवान ।।25

सफल बनावे तव आराधन ।

गयत्री जाप सार्ह हे साधन ।।26

संध्या त्रिकल करत जो कोई ।

पावे कृपा सदा तव वोही ।।27

चित्त शांती सूर्यशटक देवे ।

व्याधि उपाधी सब हर लेवे ।।28

आस्ठदल कमल यंत्रा सुभकारी ।

पूजा उपसन तव सुखकारी ।।29

माघ माज़ सुद्ध सप्तमी पवन ।

आरंभ हो तव सुभ व्रत पालन ।।30

भानु सप्तमी मंगल करी ।

भक्ति दायिनी दोषं हरि ।।31

रवि वासर जो तुम को ध्यावे ।

पुत्रादिक सुख वैभव पावे ।।32

पाप रूपी पर्वत के विनाशी ।

वज्र रूप तुम हो अविनाशी ।।33

राहू आन तव ग्रास बनावे ।

ग्रहण सूर्य तब को लग जाये ।।34

धर्म दान टाप करत है साधक ।

मिटत राहू तब पीड़ा बधक ।।35

सूर्य देव तब कृपा कीजे ।

दीर्घा आयु बाल बुद्धि डेजे ।।36

सूर्य उपासना कर नित ध्यावे ।

कुस्त रोग से मुक्ति पावे ।।37

दक्षिण दिशा तोरी गति ग्‍यावे ।

दक्षिणायन वोही केहलावे ।।38

उत्तर मार्जी तो उरु रथ होवे ।

उतरायण तब वो केहलावे ।।39

मन आरू वचन कर्म हो पवन ।

संयम करत भले नित आर्धन ।।40

दोहा

भारत दस चिंतन करत, धार दिन कर तव ध्यान।

रखियो कृपा इस भक्त पे, तुम्हारी सूर्य भगवान ।।

3. श्री सूर्य चालीसा पढ़ने के फायदे

हिंदू धर्म के अनुसार श्री सूर्य नारायण ऐसे देव हैं जो साक्षात् दिखाई देते हैं। इनका उल्लेख वेदों और पुराणों में भी बताया गया है। श्री सूर्यदेव की पत्नी का नाम अदिति और छाया है। श्री शनिदेव इनके पुत्र हैं।

श्री सूर्य देव की चालीसा पाठ करने का विशेष महत्व है। श्री सूर्य चालीसा का पाठ सच्चे मन से करने से व्यक्ति के जीवन में कई लाभ देखने को मिलता है। इसके नियमित पाठ से व्यक्ति को लम्बी उम्र का वरदान प्राप्त होता है।
श्री सूर्य चालीसा के पाठ से शारीरिक कष्ट रोग व्याधि दूर होता है। निरोगी जीवन व्यतीत करने में मदद मिलती है।

इसके नियमित पाठ मनोबल बढ़ाने में सहायक होता है। विद्या प्राप्ति में सहायक होता है। इस तरह श्री सूर्य चालीसा का पाठ विद्यार्थियों के लिए भी विशेष लाभकारी होता है। साथ ही इसके नियमित पाठ से मानसिक रोगी को भी लाभ प्राप्त होता है।

श्री सूर्य चालीसा के पाठ से समाज में व्यक्ति का मान सम्मान बढ़ता है। समाज में उनको आदर प्राप्त होता है।

4. Shri Surya Chalisa In English

॥ Doha ॥

Kanaka Badana Kundala Makara,Mukta Mala Anga !

Padmasana Sthita Dhyaie,Shankha Chakra Ke Sanga !!

॥ Chaupai ॥

Jai Savita Jai Jayati Divakara !

Sahasranshu Saptashva Timirahara !!1

Bhanu! Patanga! Marichi! Bhaskara !

Savita Hansa! Sunura Vibhakara !!2

Vivaswana Aditya Vikartana !

Martanda Harirupa Virochana !!3

Ambaramani Khaga Ravi Kahalate !

Veda Hiranyagarbha Kaha Gate !!4

Sahasranshu Pradyotana, Kahikahi !

Munigana Hota Prasanna Modalahi !!5

Aruna Sadrisha Sarathi Manohara !

Hankata Haya Sata Chadi Ratha Para !!6

Mandala Ki Mahima Ati Nyari !

Teja Rupa Keri Balihari !!7

Uchchaihshrava Sadrisha Haya Jote !

Dekhi Purandara Lajjita Hote !!8

Mitra Marichi Bhanu Aruna Bhaskara !

Savita Surya Arka Khaga Kalikara !!9

Pusha Ravi Aditya Nama Lai !

Hiranyagarbhaya Namah Kahikai !!10

Dwadasa Nama Prema So Gavain !

Mastaka Baraha Bara Navavain !!11

Chara Padaratha Jana So Pavai !

Dukha Daridra Agha Punja Nasavai !!12

Namaskara Ko Chamatkara Yaha !

Vidhi Harihara Ko Kripasara Yaha !!13

Sevai Bhanu Tumahin Mana Lai !

Ashtasiddhi Navanidhi Tehin Pai !!14

Baraha Nama Uchcharana Karate !

Sahasa Janama Ke Pataka Tarate !!15

Upakhyana Jo Karate Tavajana !

Ripu So Jamalahate Sotehi Chhana !!16

Dhana Suta Juta Parivara Badhatu Hai !

Prabala Moha Ko Phanda Katatu Hai !!17

Arka Shisha Ko Raksha Karate !

Ravi Lalata Para Nitya Biharate !!18

Surya Netra Para Nitya Virajata !

Karna Desa Para Dinakara Chhajata !!19

Bhanu Nasika Vasakarahunita !

Bhaskara Karata Sada Mukhako Hita !!20

Ontha Rahai Parjanya Hamare !

Rasana Bicha Tikshna Basa Pyare !!21

Kantha Suvarna Reta Ki Shobha !

Tigma Tejasah Kandhe Lobha !!22

Pusham Bahu Mitra Pithahin Para !

Tvashta Varuna Rahata Su-Ushnakara !!23

Yugala Hatha Para Raksha Karana !

Bhanumana Urasarma Su-Udarachana !!24

Basata Nabhi Aditya Manohara !

Katimanha, Rahata Mana Mudabhara !!25

Jangha Gopati Savita Basa !

Gupta Divakara Karata Hulasa !!26

Vivaswana Pada Ki Rakhavari !

Bahara Basate Nita Tam Hari !!27

Sahasranshu Sarvanga Samharai !

Raksha Kavacha Vichitra Vichare !!28

Asa Jojana Apane Mana Mahi !

Bhaya Jagabicha Karahun Tehi Nahi !!29

Dadru Kushtha Tehi Kabahu Na Vyapai !

Jojana Yako Mana Manha Japai !!30

Andhakara Jaga Ka Jo Harata !

Nava Prakasha Se Ananda Bharata !!31

Graha Gana Grasi Na Mitavata Jahi !

Koti Bara Main Pranavaun Tahi !!32

Manda Sadrisha Suta Jaga Me Jake !

Dharmaraja Sam Adbhuta Banke !!33

Dhanya-Dhanya Tuma Dinamani Deva !

Kiya Karata Suramuni Nara Seva !!34

Bhakti Bhavayuta Purna Niyam So !

Dura Hatataso Bhavake Bhrama So !!35

Parama Dhanya So Nara Tanadhari !

Hain Prasanna Jehi Para Tama Hari !!36

Aruna Magha Mahan Surya Phalguna !

Madhu Vedanga Nama Ravi Udayana !!37

Bhanu Udaya Baisakha Ginavai !

Jyeshtha Indra Ashadha Ravi Gavai !!38

Yama Bhado Ashwin Himareta !

Katika Hota Divakara Neta !!39

Agahana Bhinna Vishnu Hain Pusahin !

Purusha Nama Ravi Hain Malamasahin !!40

॥ Doha ॥

Bhanu Chalisa Prema Yuta,Gavahin Je Nar Nitya !

Sukha Sampatti Lahi Bibidha,Honhi Sada Kritakritya

6. Shri Surya Chalisa Lyrics in English

Doha

Shri Raviharat Aa Horat Tame, Aganit Kiran Pasari !

Vandan Karu Tan Charan Mein, Argh Devu Jal Dhari !!1

Sakal Shristi Ke Swami Ho, Sachrachar Ke Nath !

Nisdin Hot He Tumse Hi, Hovat Sandhya Prabhat !!2

Chaupaai

Jai Bhagwan Surya Tamhari !

Jai Khagesh Dinkar Subhkari !!1

Tum Ho Shristi Ke Netra Swaroopa !

Trigun Dhari Trai Ved Swaroopa !!2

Tum Hi Karta Palak Sanharak !

Bhuvan Chaturdash Ke Sanchalak !!3

Sundar Vadan Chaturbhuj Dhari !

Rashmi Rathi Tum Gagan Vihari !!4

Chakra Shankh Aru Swet Kamaldhar !

Varmudra Sohat Chothekar !!5

Shish Mukat Kundal Gal Mala !

Charu Tilak Tav Bhal Vishala !!6

Shakht Ashwa Rat Drut Gami !

Arun Sarathi Gati Avirami !!7

Rakht Varan Abhusan Dharak !

Atipriya Tohe Lal Padarath !!8

Sarvatama Kahe Tumhi Rigveda !

Metra Kahe Tum Ko Sab Veda !!9

Panch Dev Mein Pooje Jate !

Man Vanchit Phal Sadhak Pate !!10

Dwadash Naam Jaap Aaudharak !

Rog Shok Aru Kasth Nivarak !!11

Maa Kunti Tav Dhyan Lagayo !

Danveer Sut Karan So Payo !!12

Raja Yudhisthir Tav Jas Gayo !

Akshay Patra Vo Ban Mein Payo !!13

Shastra Tyag Arjun Akurayo !

Ban Aditya Hriday Se Payo !!14

Vindyachal Tab Marg Mein Aayo !

Haha Kar Timir Se Chayo !!15

Muni Agastya Giri Garv Mitayo !

Nijtak Ban Se Vindhya Na Vayo !!16

Muni Agastay Tav Mahima Gayi !

Sumir Bhaye Vijayi Raghurai !!17

Tohe Virok Madhur Phal Jana !

Mukh Mein Linhi Tohe Hanumana !!18

Tav Nandan Shanidev Kahave !

Pavan Te Sut Shani Tir Mitave !!19

Yagna Vrat Stuti Tumhari Kinhi !

Bhet Shukla Yagurved Ki Dinhi !!20

Suryamukhi Khari Tar Tav Roopa !

Krishna Sudarshan Bhanu Swaroopa !!21

Naman Tohe Omkar Swaroopa !

Naman Aatma Aru Kaal Swaroopa !!22

Dig-digant Tav Tej Prakashe !

Ujjwal Roop Tumahi Aakashe !!23

Das Digpal Karat Tav Sumiran !

Aanjan Netra Karat He Sumiran !!24

Trividh Taap Harta Tum Bhagwan !

Gyan Jyoti Karta Tum Bhagwan !!25

Safal Banave Tav Aaradhan !

Gayatri Jaap Sarh He Sadhan !!26

Sandhya Trikal Karat Jo Koi !

Pave Kripa Sada Tav Wohi !!27

Chitt Shanti Suryashtak Deve !

Vyadhi Upadhi Sab Har Leve !!28

Aasthdal Kamal Yantra Subhkari !

Pooja Upasan Tav Sukhkari !!29

Magh Maas Suddh Saptami Pavan !

Aarambh Ho Tav Subh Vrat Palan !!30

Bhanu Saptami Mangal Kari !

Bhakti Dayini Doshan Hari !!31

Ravi Vasar Jo Tum Ko Dhyave !

Putradik Sukh Vaibhav Pave !!32

Paap Roopi Parvat Ke Vinashi !

Vajr Roop Tum Ho Avinashi !!33

Rahu Aan Tav Gras Banave !

Grahan Surya Tab Ko Lag Jaye !!34

Dharm Dan Tap Karat Hai Sadhak !

Mitat Rahu Tab Pida Badhak !!35

Surya Dev Tab Kripa Kije !

Dirgha Aayu Bal Buddhi Deje !!36

Surya Upasana Kar Nit Dhyave !

Kusth Rog Se Mukti Pave !!37

Dakshin Disha Tori Gati Gyave !

Dakshinayan Wohi Kehlave !!38

Uttar Margi To Uru Rath Hove !

Utrayan Tab Wo Kehlave !!39

Man Aru Vachan Karm Ho Pavan !

Sanyam Karat Bhale Nit Aardhan !!40

Doha

Bharat Das Chintan Karat, Dhar Din Kar Tav Dhyan !

Rakhiyo Kripa Is Bhakt Pe, Tumhari Surya Bhagwan !!

दोस्तों आज के लेख में हमने श्री सूर्य नारायण भगवान की चालीसा पाठ हिंदी व अंग्रेजी में जाना

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